व्यायाम के बाद मांसपेशियों के दर्द से राहत पाने का विज्ञान (The Science of Recovery: Understanding the Mechanisms Behind Muscle Pain Relief)

Muscle pain

दर्द से मुक्ति: मांसपेशियों के दर्द के पीछे के कारणों की समझ (Muscle Pain)

एक पेशेवर की तरह उबरें: इन विशेषज्ञ रणनीतियों के साथ मांसपेशियों के दर्द और दर्द को अलविदा कहें (Recover Like a Pro: Say Goodbye to Muscle Pain and Soreness with These Expert Strategies)

अगर कभी कभी जरूरत से ज्यादा बेंच प्रेस के सेट और बहुत ज्यादा एरोबिक व्यायाम करने से आप पूरी तरह शक्ति हीन महसूस करते हैं, आपके माँसपेशियों में असहनीय दर्द (Muscle Pain) है और आपको ऐसा लगता है कि आप बीमार हैं। तो आप जरूरत से ज्यादा व्यायाम अर्थात ओवर ट्रेनिंग के बुरे असर से पीड़ित है।

हर खेल के हर खिलाड़ी ने अपने जीवन में कभी न कभी किसी दिन ज्यादा शक्तिशाली महसूस करते हैं उस दिन आप सामान्य रूटीन से ज्यादा जोरदार व्यायाम रूटीन करते हैं और अगले दिन आपके माँसपेशियों और जोड़ों में दर्द होता है। कई युवक बिना आराम के लगातार हर रोज किसी ने किसी अंग का व्यायाम करते हैं और वो माँसपेशियों को थकान और दर्द (Muscle Pain) से उभरने का मौका भी नहीं देते है और यही कारण है कि उनके माँसपेशियों में इतना ज्यादा दर्द रहता है ।

माँसपेशियों में कई प्रकार का दर्द हो सकता है। आप कभी कभी केवल थोड़ा थकान महसूस करते हैं और कई बार इतना अधिक दर्द होता है कि उस माँसपेशी या अंग को हिलाना या उससे कोई काम करना असंभव हो जाता है। जब माँसपेशियों में इस प्रकार दर्द हो तो क्या करना चाहिए?

ज्यादातर लोग इस दर्द को सहकर उसके जाने का इंतजार करते हैं। दुख की बात यह है कि इस इंतजार के दौरान आप कीमती समय तथा ट्रेनिंग रूटीन खोते हैं और आपके विकास की गति भी धीमी हो जाती है। अब वैज्ञानिकों ने इस समस्या के कई समाधान खोज निकाले हैं जिससे आप माँसपेशियों का दर्द दूर करके थकान से शीघ्र उभर पाएंगे।

एक जोरदार व्यायाम रूटीन, सही तकनीक और आवश्यकता के अनुसार यदि सेट और रैप किए जाएं तो आप ओवर ट्रेनिंग के खतरे से बचे रह सकते हैं। मगर याद रखें कि केवल व्यायाम रूटीन में बदलाव लाना काफी नहीं। आपको सही मात्रा में आराम भी करना होगा तथा सही मात्रा में अपने शरीर को पोषक तत्व भी प्रदान करना होगा जिससे कि आपके माँसपेशी पुनः शक्तिशाली होकर अगले रूटीन से पहले तैयार हो सके।—

स्वस्थ खिलाड़ी ज्यादातर चार तरह के दर्द को महसूस करते हैं व्यायाम के तुरन्त बाद माँसपेशियों में कष्ट (Muscle Pain), डॉम्स डीलेड ओनसेट मसल सोरनेस, ईधन की कमी और ओवर ट्रेनिंग के बुरे असर।

इसके अलावा कुछ खतरनाक बीमारियों के कारण भी आपको माँसपेशियों में असहनीय दर्द रह सकता है। यदि हमारे द्वारा बताए गए तकनीकों के प्रयोग के बाद भी आपका दर्द दूर ना हो तो तुरन्त अपने डॉक्टर की सलाह लें। हम केवल व्यायाम से उठने वाले माँसपेशियों के दर्द का समाधान बता रहे हैं। यदि आपके जोड़ों में, टेन्डन या लीगमेन्ट में दर्द हो तो ये समाधान आपके कष्ट को दूर नहीं कर सकेंगे। इनके लिए अलग उपचार की आवश्यकता पड़ेगी।

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डॉम्स- डिलेड ऑनसेट मसल सोरनेस (DOMS – Delayed Onset Muscle Soreness)
यह बॉडी बिल्डरों को होने वाला सबसे साधारण दर्द है और यह ज्यादातर सभी स्तर के खिलाड़ियों में पाया जाता है। इसका मुख्य कारण है व्यायाम के दौरान मसल फाइबरों को लगने वाली चोट। माँसपेशियों में कुछ रासायनिक तत्व जमा होते हैं जो मसल फाइबरों को चोट लगने पर निकलते हैं। इनके निकलने पर दर्द और अधिक बढ़ जाता है। यही कारण है कि व्यायाम के 1 से 3 दिन तक यह दर्द और बढ़ता जाता है।

डॉम्स (DOMS) के कारण कई बार आपके माँसपेशी सूज जाते हैं और इसकी वजह से आपके माँसपेशियों में पोषक तत्व नहीं पहुँच पाते हैं। माँसपेशियों को जब चोट पहुँचती है तब कुछ केमिकल जैसे प्रोस्टाग्लैंडिंस और हिस्टमीन (prostaglandins and histamine) का निर्माण होता है जो इस दर्द को लम्बे समय तक बढ़ा देते हैं।

क्या आप डॉम्स से बचकर जोरदार व्यायाम रूटीन कर पाएंगे?-
कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि खिलाड़ियों को व्यायाम रूटीन के अगले दिन माँसपेशियों को अच्छी तरह स्ट्रेच करना चाहिए। इससे कुछ हद तक दर्द (Muscle Pain) का समाधान हो जाता है। कई खिलाड़ी मानते हैं कि व्यायाम से पहले यदि आप अच्छी तरह वार्म अप करें और व्यायाम के उपरान्त पूरा कूल डाउन करें तो आप काफी हद तक डॉम्स से बचे रहेंगे। वार्म अप और कूलडाउन के दौरान स्ट्रेचिंग व्यायाम अवश्य करें। इससे माँसपेशियों में कम दर्द होगा।

यदि आप आराम के दिनों में सिर्फ लेटने की जगह चुस्त आराम जैसे हल्का फुल्का व्यायाम, कुछ काम काज आदि करेंगे तो इससे उन हिस्सों में रक्त का बहाव बढ़ जाता है। पीड़ित हिस्सों को रक्त के माध्यम से पोषक तत्व प्राप्त होते हैं जो मसल फाइबरों को शीघ्र थकान और दर्द से उभरने का अवसर देते हैं। डॉम्स कोई चिन्ता का विषय नहीं है ।

यह ज्यादातर सभी व्यायाम करने वाले युवकों को होता है। जब आप वजन से व्यायाम करते है तब आपके माँसपेशियों पर नया जोर पड़ता है। ऐसे में आपके मसल फाइबर टूटते हैं। आराम और आहार से आपके मसल फाइबर अगले व्यायाम रूटीन से पहले और शक्तिशाली बन जाते हैं। इस प्रक्रिया से शारीरिक विकास होता है।

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सूजन से लड़ाई-
जब भी आपको चोट लगती है तब आपके उस हिस्से में सूजन होना सामान्य है चाहे वो सूजन आपको नजर आए या ना आए। ऐसी कई दवाईयाँ है जो स्टिरॉएड नही हैं मगर जो सूजन को कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं। दवाइयों के बिना भी आप बर्फ, गर्मी या मालिश से सूजन और दर्द को कम कर सकते हैं। आज कल ज्यादातर सभी कोच और ट्रेनर आपको यही सब करने की सलाह देंगे। बताए गए हर तरीके के अपने फायदे है और अपने नुकसान हैं।

दवाईयों का कमाल-
ये दवाइयाँ स्टिराएड नहीं हैं। ये आपके सूजन को कम करने में सहायक हैं। चोट लगने पर माँसपेशियों में प्रोस्टाग्लैंडिंस तथा अन्य रासायनिक तत्वों का निर्माण होता है जो दर्द और सूजन को बढ़ाते हैं। ये दवाइयाँ इन तत्वों के निर्माण को रोकते हैं या फिर काफी हद तक कम करते हैं। वैज्ञानिक मानते है कि ये दवाइयाँ व्यायाम के बाद होने वाले दर्द (Muscle Pain) को कम तो करते हैं मगर पूरी तरह खत्म करने की क्षमता नहीं रखते हैं।

कई खिलाड़ी इन दवाइयों को काफी ज्यादा मात्रा में लेकर इनका दुरुपयोग करते हैं। इन दवाइयों का सेवन केवल कभी कबार करना चाहिए जब दर्द असहनीय हो जाए। इन दवाइयों से पेट में अल्सर हो सकते हैं। इनके साइड एफेक्ट की पूरी जानकारी के लिए डाक्टर की सलाह लें। इन दवाइयों को हमेशा खाने के साथ या खाने के तुरन्त बाद लें।

बर्फ और गर्मी का कमाल-
ज्यादातर सभी व्यायाम विशेषज्ञ मानते हैं कि दर्द के शुरूवात में बर्फ लगाना चाहिए। ये सभी माँसपेशियों की चोटों (Muscle Pain) में शीघ्र राहत पहुँचाने के लिए जाना जाता है। मसल फाइबर के फटने पर आप अगले दिन दर्द को काफी कम कर सकते हैं यदि आप तुरन्त चोट की जगह पर बर्फ लगाते हैं। बर्फ से सूजन कम हो जाता है तथा मांसपेशियों का मेटाबॉलिज्म कम हो जाता है। इससे आपकी चोट शीघ्र ठीक होने लगेगी। या तो आइस पैक का प्रयोग करें या प्लास्टिक ग्लास में बर्फ जमाकर उसे चोट के स्थान पर रखें। कभी भी बर्फ को सीधा चोट पर ना लगाए। हमेशा चोट के ऊपर कोई कपड़ा या तोलिया रखें । इस प्रकार आप करीब 20 मिनट तक बर्फ उस हिस्से पर लगा सकेंगे।

गर्म सेक भी कई बार माँसपेशियों के दर्द (Muscle Pain) से लड़ने में आपकी मदद कर सकता है, खासकर जब आपको माँसपेशियों में कोई चोट ना पहुँचा हो । व्यायाम रूटीन के करीब 12 घंटों के बाद आप गर्म सेक का प्रयोग कर सकते हैं। गर्मी से माँसपेशियों में रक्त का बहाव बढ़ जाता है। रक्त के बहाव के बढ़ने से शरीर शीघ्र पीड़ित हिस्सों को पोषक तत्व मिलते हैं जिससे वो जल्दी दर्द से उभर पाते हैं। चोट लगने पर या आपके पीड़ित हिस्से में कोई खास सूजन नजर आने पर 72 घंटों से पहले पीड़ित हिस्से पर गर्म सेक ना लगाएं। आप हीट पैक का इस्तेमाल कर सकते हैं, या फिर गर्म पानी में तौलिये गीला करके उसे पीड़ित हिस्से पर लगा सकते हैं। आप तोलिए को तवे पर भी गर्म कर सकते हैं।

बाम का प्रयोग-
ज्यादातर सभी बाम कुछ समय तक दर्द को दूर करते हैं मगर उसके बाद दर्द फिर लोटता है। कई बाम में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो दर्द के संदेश को दिमाग तक नहीं पहुँचने देते हैं और इस तरीके से वो आपके दर्द को कम करते हैं। कई बाम में ऐसे तत्व भी पाए जाते हैं जो दर्द बढ़ाने वाले रसायन को शरीर में कम करते हैं या उनके निर्माण को कम करते हैं। कई होमियोपॅथिक बाम आपको दर्द से राहत प्रदान कर सकते हैं। खिलाड़ियों को ऐसे तत्वों से अलग अलग असर मिलता है। यदि आपको एक बाम से कोई खास लाभ ना हो तो दूसरे बाम का प्रयोग करके देखें|

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मालिश-
कई सालों से भारत में पहलवान मालिश को अपने प्रतिदिन रुटीन में शामिल करते आ रहें है। यूरोप में भी खिलाड़ियों के व्यायाम के बाद होने वाले थकान को शीघ्र दूर करने के लिए मालिश का प्रयोग किया जाता था। यह बात पिछले कुछ सालों में अमरीका में भी प्रसिद्ध हो गई है। वैसे तो जब कोई आपकी मालिश करता है तो काफी अच्छा और आरामदेह महसूस होता है मगर वैज्ञानिकों द्वारा किए गए कई प्रयोगों से यह साबित नहीं किया जा सका कि थकान दूर (Muscle Pain) करने में मालिश कार्यशील है।

कई वैज्ञानिक और व्यायाम विशेषज्ञ यह मानते हैं कि मालिश करने पर उस हिस्से में रक्त का बहाव बढ़ जाता है जिससे उस जगह का दर्द कम होने लगता है। इससे आपका पी एच लेवेल भी शीघ्र सामान्य होने लगता है। यदि आप किसी मालिश करने वाले के पास जाते हैं तो वो आपको बताएगा कि मालिश करने पर आपके माँसपेशियों से लैक्टिक एसिड (lactic acid) बाहर निकल जाता है मगर यह फालतू बकवास है। आधुनिक खोज के अनुसार मालिश से कोई नुकसान नहीं होता। यदि आपको मालिश करवाने के बाद अच्छा महसूस हो तो अवश्य करवाएं ।

ईंधन की कमी-
आपका शरीर व्यायाम या फिर किसी भी कार्य को करने के लिए कार्बोहाइड्रेट, फैट और प्रोटीन को ईधन के रूप में इस्तेमाल करता है। वैसे तो ये तीनों ही तत्व जरूरी हैं मगर जोरदार शारीरिक व्यायाम के दौरान शरीर कार्बोहाइड्रेट का इस्तेमाल करता है। आपके शरीर में कार्बोहाइड्रेट ग्लाइकोजन के रूप में माँसपेशियों के अन्दर जमा रहता है। एक और जगह जहाँ ग्लाइकोजन (Glycogen) जमा रहता है वो है लिवर।

लिवर में व्यायाम के दौरान ग्लाइकोजन टूटकर ब्लड शुगर का रूप लेता है। यदि आपके माँसपेशियों में आवश्यक मात्रा में ग्लाइकोजन ना हो या आपका ब्लड शुगर का स्तर कम हो तो आपको कमजोरी महसूस होगी। वैज्ञानिकों ने खिलाड़ियों और बॉडी बिल्डरो पर कई प्रयोग करके यह पाया कि जोरदार व्यायाम करने पर शरीर मे मसल ग्लाइकोजन (माँसपेशियों में पाया जाने वाला ग्लाइकोजन) का स्तर समय के साथ धीरे धीरे कम होने लगता है। जैसे जैसे शरीर में ग्लाइकोजन का स्तर कम होने लगता है। वैसे-वैसे आपकी एनर्जी लेवल (शक्ति का स्तर भी कम होने लगता है और आप थकान महसूस करने लगते हैं। धीरे-धीरे आपके माँसपेशियों में दर्द (Muscle Pain) होने लगता है, तथा आपकी व्यायाम तीव्रता और जोश भी कम होने लगती है।

आप ईंधन की कमी से बच सकते हैं यदि आप व्यायाम के दौरान एनर्जी प्रदान करने वाले तत्वों का सेवन करें। आहार में भी सभी जरूरी तत्वो का पूरा ध्यान रखें। व्यायाम के तुरन्त बाद कार्बोहाइड्रेट से भरपूर आहार का सेवन करें। इससे आपके शरीर का ग्लाइकोजन स्तर तुरन्त पूरा हो जाता है। व्यायाम के दौरान भी आप किसी स्पोर्ट डिंक का सेवन कर सकते हैं। इसमें थोड़ा कार्बोहाइड्रेट होता है जो आपको शीघ्र एनर्जी प्रदान करके शरीर में ईंधन की कमी नही होने देता।

व्यायाम के तुरन्त बाद पहले दो घंटे किसी भी बॉडी बिल्डर के लिए सबसे जरूरी समय होता है। इस समय शरीर सबसे शीघ्र पोषक तत्वों को स्वीकार करके ग्लाइकोजन स्तर को फिर से बढ़ा लेता है। यह ग्लाइकोजन दिन भर के कार्यों को करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। शरीर को फिर से कार्बोहाइड्रेट प्रदान करने के लिए व्यायाम के तुरन्त बाद कार्बोहाइड्रेट से भरपुर एक आहार का सेवन करें। आप किसी पोस्ट वर्कआउट मील अर्थात व्यायाम के बाद लिया जाने वाला शेक का सेवन भी कर सकते हैं।

यह बात खास तौर से वजन से व्यायाम करने वाले युवकों पर लागू होती है। व्यायाम के तुरन्त बाद लिए जाने वाले शेक में करीब 70% कार्बोहाइड्रेट होना चाहिए जो दोनों साधारण और गहन रूप में हो। इसके अलावा उस शेक में करीब 20% से 25% उच्च श्रेणी का प्रोटीन होना चाहिए जो शीघ्र पच जाए और करीब 5% से 10% फैट होना चाहिए।

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व्यायाम के बाद का असर-
व्यायाम के तुरन्त बाद कई बार माँसपेशियाँ काफी ज्यादा चंचल हो जाते हैं। इसका मुख्य कारण है व्यायाम के दौरान उन पर पड़ने वाला जोर और तनाव। रात को हैमस्ट्रिंग या टांगों में खींच पड़ना (leg cramps) या उनका अकड़ जाना इस प्रकार उनके चंचल हो जाने की एक निशानी है। आपके शरीर में पानी और नमक का स्तर जब बदल जाता है तब दिमाग इस प्रकार के संदेश भेजता है। सही मात्रा में पानी पीने से आप कुछ हद तक इस परेशानी को दूर कर सकेंगे।

व्यायाम के दौरान भी आपको पानी पीते रहना चाहिए जिससे कि शरीर में पानी की कमी ना हो। कई लोग आहार में जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन करते हैं । इस कारण से शरीर में बैलेन्स बनाए रखने के लिए उनको सही मात्रा में पानी भी पीना चाहिए। जो लोग गरम प्रदेश में रहते है उन्हें खास तौर से पानी का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि वो पसीने के रूप में काफी पानी खोते हैं। यदि आप मसल क्रॅम्प से बचना चाहते हैं तो आपको कुछ ज्यादा नमक का सेवन करना होगा।

यदि आप व्यायाम के उपरान्त अपने केन्द्रित माँसपेशी पर स्टॅटिक स्ट्रेचिंग का प्रयोग करेंगे अर्थात किसी भी स्ट्रेच को करीब 20 से 30 सेकेन्ड रोककर रखेंगे तो आप मांसपेशियों के अति चंचलता से बच सकेंगे। इस प्रकार के स्ट्रेचिंग व्यायामों का प्रयोग करें ।

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ओवर ट्रेनिंग-
जब आप ओवर ट्रेनिंग की अवस्था में पहुँचते हैं तो उसकी एक स्पष्ट निशानी है जिम मे खराब प्रदर्शन। इससे आपके माँसपेशी ज्यादा थकान तथा शक्तिहीनता करते हैं और आपका उत्साह और जोश भी काफी कम हो जाता है। आप अपने व्यायाम रूटीन को सामान्य तीव्रता से भी नहीं कर पाते हैं। इस स्थिति को नेगेटिव नाइट्रोजेन बैलेन्स बोलते है। इस अवस्था में आपका शरीर जितने प्रोटीन को सेवन करता है उससे कई ज्यादा प्रोटीन खो देता है। वैज्ञानिकों ने रिसर्च से पाया है कि यदि आप ब्रांच चैन अमीनो एसिड का सेवन करते हैं तो आप प्रोटीन के नष्ट होने की क्रिया को काफी हद तक कम कर सकते हैं। एक और रिसर्च से यह साबित हुआ कि ग्लूटामिन की कमी से शरीर ओवर ट्रेनिंग की अवस्था में पहुँचता है।

ओवर ट्रेनिंग से आपके शरीर का इम्यून सिस्टम (जो बीमारियों से लड़ता है) कमजोर पड़ जाता है और इससे अनेक बीमारियों के होने की संभावना बढ़ जाती है। इससे आपके शरीर के हार्मोन के निर्माण की क्रिया पर भी बुरा असर पड़ता है। मर्दों में ओवर ट्रेनिंग से सेक्स होर्मोन टॅस्टॉस्टेरॉन का निर्माण भी कम हो जाता है तथा कॉर्टिसोल का निर्माण बढ़ जाता है। ओवर ट्रेनिंग से औरतों में हड्डियों की कमजोरी तथा अन्य बीमारियाँ हो जाती हैं।

अपने आहार, आराम और व्यायाम रूटीन की रचना सोच समझकर करें। आहार और आराम पर भी भरपूर ध्यान दें। सही मात्रा में सभी जरूरी पोषक तत्वों का सेवन करे। इससे शरीर एनबोलिक अवस्था अर्थात माँसपेशियों के निर्माण के अवस्था में रहता है।

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