अश्वगंधा – कायाकल्प करने वाला आयुर्वेद का एक रसायन (Ashwagandha – An Ayurveda Rasayana with Rejuvenating Quality)

ashwagandha

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Ashwagandha ka kya fayda hai?. Isko kaise lena hai?

आयुर्वेद में रसायन औषद्यि को कायाकल्प (Rejuvenating) करने वाली औषद्यि कहा जाता है। कायाकल्प (Rejuvenating) का मतलब समझें तो यौवन बना रहना, बीमारियां  न होना  (strong immune system), दीर्घ आयु होना, शरीर और चेहरे पर तेज, स्मरण शक्ति बनी रहे, तेज दिमाग इत्यादि। अश्वगंधा (Ashwagandha) जिसका रासायनिक नाम (Withania somnifera)है इन्ही रसायनो में से एक जड़ी-बूटी है।

अश्वगंधा (Withania somnifera) की ताजा पत्तियों तथा जड़ों में घोड़े की मूत्र की गंध आने के कारण ही इसका नाम अश्वगंधा पड़ा। ये एक गरम प्रकर्ति वाली जड़ी-बूटी है जिसका प्रयोग दुनिया भर में दिमाग से सम्बंधित रोग जैसे तनाव(stress), चिंता(tension) इत्यादि के लिए उपयोग में लिया जाता है इसलिए इसको बहुत इफेक्टिव एंटी स्ट्रेस (ANTI-STRESS) जड़ी-बूटी कहा जाता है । इसकी जड़ का चूर्ण का उपयोग किया जाता है ये चूर्ण, कैप्सूल और तरल के रूप में बाजार में आसानी से मिल जाता है।

अश्वगंधा के गुण और फायदे-

  • आयुर्वेद के अनुसार अश्वगंधा (Ashwagandha) हल्का, गरम प्रकर्ति वाला है इसलिए वात और कफ प्रकर्ति वालो के लिए या फिर जिन्हे वात और कफ के बिगड़ने से रोग हुए है उनके लिए बहुत अच्छा है।
  • श्वास के रोगों यानि श्वसन प्रणाली (respiratory system) के रोगो को सही करने में ये बहुत कारगर औषद्यि है। हाल ही में आईआईटी दिल्ली (IIT-Delhi) और जापान के एक प्रौद्योगिकी संस्थान के अनुसंधान में यह पाया गया है कि अश्वगंधा (Ashwagandha) कोविड-19 (COVID-19) कोरोना संक्रमण के खिलाफ उपचारात्मक और इसकी रोकथाम करने वाली एक प्रभावी औषधि हो सकती है।
  • दिमाग से सम्बंधित रोग जैसे तनाव(stress) होने पर, चिंता विकार(tension)  में, जिनकी यादाश्त कमजोर हो, में  इसका उपयोग किया जाता है।
  • शोधकर्ताओं के अनुसार अश्वगंधा (Ashwagandha) के सेवन से अश्व (घोड़े) जैसी ताकत और यौन शक्ति मिलती है।
  • जो लोग शरीर से कमजोर होते है, काम करने से जल्दी थक जाते है उनके लिए ये बहुत फायदेमंद जड़ी-बूटी है। उन्हें अश्वगंधा (Ashwagandha) चूर्ण का सेवन दूध के साथ करना चाहिए।
  • अगर किसी के पेट में कीड़ो की समस्या है या भूख कम लगती है गैस सम्बंधित पेट के रोग है तो उन्हें भी अश्वगंधा (Ashwagandha) का सेवन करना चाहिए।
  • नपुंसकता (erectile dysfunction) में ये औषद्यि बहुत फायदा करती है।
  • टेस्टोस्टेरोन(testosterone) बढ़ाने के लिए ये एक बहुत अच्छी औषद्यि है।
  • जिन महिलाओं को गर्भस्य कमजोर होना, सफ़ेद पानी जाना, मासिक धर्म की समस्या, कमर में दर्द रहने जैसी बीमारियां है वो अगर अश्वगंधा (Ashwagandha) का प्रयोग देशी गाय के घी और दूध के साथ करें तो उनके रोग बहुत जल्दी सही हो सकते है।
  • अश्वगंधा का इस्तेमाल गठिया, पीठ दर्द, मांसपेशी में दर्द, इत्यादि रोग में किया जाता है।
  • अश्वगंधा में महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीस्ट्रेस और एंटीबैक्टेरियल जैसे तत्वहोते है जिसके कारण ये हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बना देता है। जिस से हमारी रोगो से लड़ने की शक्ति बढ़ती है।
  • कैंसर जैसी बीमारी से छुटकारा तक में अश्वगंधा (Ashwagandha) का उपयोग किया जा रहा है। शोध में पाया गया है कि अश्वगंधा में एंटी टयूमर गुण हैं,जो कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है और कैंसर के नए सेल्स नहीं बनने देता जिसकी वजह से ये कैंसर को दूर करने में काफी मददगार होता है।
  • अश्वगंधा शरीर में कोर्टिसोल के स्तर को कम करके बालों के गिरने को नियंत्रित करता है। इसके इस्तेमाल से बालों में होने वाले एग्जिमा से भी राहत मिलती है। सायरोसिस जैसी समस्या और डैंड्रफ को कम करने में भी यह सहायक होता है।
  • त्वचा सम्बंधित समस्या जैसे झुर्रियों, काले धब्बे इत्यादि में ये बहुत असरदार है ये स्किन टोनर के रूप में भी त्वचा की सफाई करता है
  • आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी यह बेहतरीन औषद्यि है।

अश्वगंधा (Withania somnifera) गुणों की खान है इसके बारे में जितना लिखें कम है।

अश्वगंधा से होने वाले नुकसान/अश्वगंधा किसे नहीं लेना चाहिए-

अश्वगंधा (Withania somnifera) से किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होता है। परन्तु आयुर्वेदा के अनुसार हर औषद्यि हर शरीर के लिए नहीं होती है। जैसे अश्वगंधा (Ashwagandha) गरम है तो पित प्रकर्ति वाले लोगो को इसका सेवन नहीं करना चाहिए और अगर किसी कारण करना पड़े तो बिना वैद्यराज की सलाह के न लें। वैद्यराज आपको बता सकते है कि पित प्रकर्ति में इसको लेने का क्या तरीका है।

  • अश्वगंधा (Withania somnifera) ग्रोथ हार्मोन को एक्टिव करता है इसलिए अगर आप थाइरॉयड के पेशेन्ट्स हैं तो ये आपकी प्रॉब्लम और बढ़ सकती है।
  • अगर आप डायबिटीज की दवाई ले रहे है तो उस के साथ अश्वगंधा का प्रयोग न करें
  • अगर आप का शारीरिक वजन ज्यादा है तो भूल कर भी अश्वगंधा न ले। ये एक टॉनिक है जो शरीर का वजन बढ़ाता है।
  • अगर आपको निम्न रक्त चाप (Low blood pressure) की बीमारी है तो अश्वगंधा (Withania somnifera) ना ले।
  • महिलाएं गर्भावस्था  में या अगर वे स्तनपान करवाती है तो इसका उपयोग न करें।

ध्यान दें:– आपसे अनुरोध है कि यहाँ बताये गए अश्वगंधा (Ashwagandha) का प्रयोग करने से पहले अपने डॉक्टर / वैद्यराज की सलाह जरूर ले। उपरोक्त वर्णित सभी जानकारी अनुभव एवं अनुशंधान के आधार पर लिखी गई हैं, जानकारी के अनुसार किये जाने वाले प्रयोग या उपायों कि प्रामाणिकता एवं लाभ-हानि की जिन्मेदारी संपादक की नहीं हैं।

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4 thoughts on “अश्वगंधा – कायाकल्प करने वाला आयुर्वेद का एक रसायन (Ashwagandha – An Ayurveda Rasayana with Rejuvenating Quality)

  1. बहुत अच्छा लिखा है। अच्छा लगा आप हिंदी में इतनी जानकारी अपने ब्लॉग पर डाल रहे है ।

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