increase muscle size

10 नियम जिनसे आप अपने आकार को बढ़ा सकते है।- Increase muscle size

ज्यादातर जिम जाने वाले युवकों के दिमाग में 24 घंटे एक ही बात घूमती रहती है कैसे अपनी मसल्स का आकार (increase muscle size) बढ़ाया जाए कैसे मैं अपने साथ वाले से ज्यादा बड़ी मसल्स बना सकता हूँ। जिस तरह इस संसार में हर काम को होनें के कुछ नियम होते है उसी प्रकार मसल्स का आकार (increase muscle size) बढ़ाने के कुछ नियम है जिनका पालन करके ही आप को अपने ट्रेनिंग से ज्यादा से ज्यादा लाभ ले कर अपने आकार को बढ़ा सकते है।

1. भारी वजन से व्यायाम करें।
यह नियम काफी सीधा साधा है। आप भारी वजन से ट्रेनिंग करेंगे तो आप शीघ्र चौड़े आकार को पाने में सफल होंगे। मगर कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी हैं जैसे झुलाकर या झटके से वजन को ना उठाए। इस प्रकार आप अपने लिए शारीरिक क्षति का मार्ग खोल रहे है। इस प्रकार चीटिंग कर ज्यादा वजन उठाकर आप वास्तव में स्वयं को धोखा दे रहे हैं। भारी वजन का अर्थ सही तरीके से समझना आवश्यक होता है। शुरूआत करने वाले युवकों के लिए वह वजन भारी माना जाता है जिससे वो 8-12 रैप के बीच कर सकें। जो युवक कुछ समय से व्यायाम करते आ रहे है उन के लिए उतना वजन भारी माना जाता है जिससे वो केवल 6-8 रैप स्वयं बिना सहयोग के पूरा कर सकें।

अगर आप उठा सकते हो तो उठाओ यह विकास के मार्ग का पहला नियम है। अगर आप ज्यादा भारी वजन उठाने का प्रयत्न ही नहीं करेंगे तो आप अपने शरीर पर पिछले रूटीन की तुलना में अधिक जोर कैसे लगा पाएंगे। एक और रैप या एक और पाउन्ड को बढ़ाने का प्रयत्न करके ही आप शक्तिशाली शरीर को पा सकेंगे।

2. पिरमिड ट्रेनिंग करें
किसी भी व्यायाम में पहले 15 रैप का एक वार्म अप सेट करें। आखिरी सेट में रैप की संख्या 5 तक हो जाती है। हर सेट के साथ अपने वजन को बढ़ाए। आखिरी सेट में वजन के भारी होने से आप 5 -7 रैप में ही थकान का एहसास कर वजन वापिस रख देते हैं। किसी भी व्यायाम के पहले सेट में ज्यादा रैप हल्के वजन के साथ करना चाहिए। यह वार्म अप का अच्छा तरीका होता है और आप अपने माँसपेशियों में रक्त का बहाव भी अच्छी तरह बढ़ा लेते है। अपने माँसपेशियों को कस कर रखें इससे भारी वजन उठाने में आसानी होती है। 5-7 रैप करते समय आप अपने माँसपेशियों को पूर्ण थकान की सीमा तक पहुँचा देते है जो विकास और मसल्स का आकार बढ़ाने (increase muscle size) के लिए अत्यंत आवश्यक होता है।

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3. अपने व्यायाम की शुरुआत फ्री वजन से करें
आपका हर व्यायाम रूटीन फ्री वजन से शुरू होना चाहिए। मतलब बारबेल और डम्बल से किए जाने वाले व्यायाम। शुरूआत हमेशा भारी और कम्पाउन्ड व्यायामों से ही करना चाहिए। पहले कम्पाउन्ड फ्री वजन फिर आइसोलेशन फ्री वजन, फिर मशीन पर कम्पाउन्ड व्यायाम और आखिर में मशीन पर आइसोलेशन व्यायाम। संसार के सारे विशालकाय और सफल बॉडी बिल्डर भी इसी शृंखला में व्यायाम करते हैं। वो अपने इस खेल के शुरुआती दौर में फ्री वजन से व्यायाम करते हैं। इससे मुख्य माँसपेशी के साथ-साथ सहयोगी माँसपेशियों का भी बेहतरीन विकास होता है और शरीर में ग्रोथ हॉर्मोन का निर्माण बढ़ जाता है।

कुछ साल अपनी नींव को मजबूत करने के उपरान्त वो कटिंग और मस्क्युलैरिटी के लिए केबल और आइसोलेशन व्यायामों का प्रयोग करते हैं। आज विज्ञान ने कई आधुनिक मशीनों का निर्माण किया है जो बिल्कुल कम्पाउन्ड व्यायामों की तरह ही असर प्रदान करते है। इन व्यायामों को आप अपने रूटीन में दूसरा या तीसरा स्थान दे सकते हैं। ध्यान रखें कि ज्यादा वजन का अर्थ है ज्यादा मसल मास। किसी भी कम्पाउन्ड व्यायाम में आप आइसोलेशन की तुलना में भारी वजन उठाते हैं। तकनीक को सही रखना भी जरूरी होता है क्योंकि चीटिंग से भारी वजन उठाने का कोई लाभ नहीं होता है। चेस्ट, लैग्स और बैक के माँसपेशियों के बेहतरीन विकास के लिए फ्री वजन और मशीनों का सह प्रयोग अच्छा माना गया है। दोनों को साथ इस्तेमाल करने से ज्यादा लाभ पाया गया है। बाजुओं और कंधों के विकास में फ्री वजन का प्रयोग ज्यादा असरदार पाया गया है। अगर आप इस नियम का पालन करें तो जल्दी ही अपनी मसल्स का आकार बढा (increase muscle size) सकते है।

4. जल्दी परिणाम और असर की चाह ना रखें
रैप और वजन को बढ़ाने का प्रयत्न करना तो आवश्यक होता है मगर आपको यह उम्मीद नहीं करना चाहिए कि हर रूटीन में आप पिछले रूटीन से बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। अगर आप स्वयं से ऐसी उम्मीद रखेंगे तो बहुत जल्द आप फायदा ना देखकर हार मान लेंगे। इसलिए अपने रूटीन पर ध्यान दें। माँसपेशियों के असर पर ध्यान दें और जो होता है उसे होने दें। अगर आज फायदा नहीं हुआ तो कल होगा। इस प्रकार की सोच आपको खुश रखता है और आपका जोश और लगन भी कम नहीं होता है। अपने हर रूटीन को पूरे जोश, लगन और जी तोड़ मेहनत के साथ करें जिससे आपको शीघ्र अपना लक्ष्य प्राप्त हो।

5. हर व्यायाम का पूरा मूवमेन्ट करें
अधूरे रैप करना शक्ति के विकास का एक अच्छा तरीका होता है जो अनुभवी बॉडी बिल्डर इस्तेमाल करते हैं। इस तकनीक से आप भारी वजन को उठाने और संभालने के आदि हो जाते है। मगर माँसपेशियों के विकास के लिए आपको अपने सभी मसल फाइबरों को व्यायाम से उत्तेजित करना पड़ेगा। इनको उत्तेजित करने के लिए आपको सभी व्यायामों का पूरा मूवमेन्ट करना होगा अर्थात पूरे एक्स्टेशन से पूरे कॉन्ट्रॅक्शन तक।

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6. किसी ख़ास अंग या मासपेशी पर ज्यादा ध्यान देना
कुछ अंगों या मांसपेशियों पर खास ध्यान देना एक असरदार सिद्धान्त होता है। ये खासकर तब प्रयोग में लाया जाता है जब आप शरीर के किसी हिस्से को बाकियों की तुलना में अधिक उभारना चाहते हैं, या उसका आकार बढ़ाना चाहते हैं। उस अंग को अपने रूटीन में सबसे पहले ट्रेनिंग देना चाहिए और बाकियों की तुलना में ज्यादा बार। जब आप इस तरह की ट्रेनिंग शैली का पालन करते हैं तो उससे एक दिन पूर्व ओवर ट्रेनिंग से बचे रहना आवश्यक हो जाता है। अगर आप चेस्ट, बाइसेप और ट्राइसेप तीनों माँसपेशियों पर खास ध्यान देना चाहते हैं तो तीनों को अलग-अलग दिन ट्रेनिंग दें। विशेष ध्यान दिए जाने वाले माँसपेशी के ट्रेनिंग से एक दिन पहले आराम करना चाहिए। अगर यह करना मुश्किल हो तो बस इस बात का ध्यान रखे कि ट्रेन किया जाने वाला अंग थका हुआ ना हो।

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7.अपने दिमाग में अपने रूटीन को करें
कई बॉडी बिल्डर जिम जाने से पहले अपने दिमाग में स्वयं को अपना रूटीन करते हुए देखते हैं। इससे उनका जोश बढ़ता है, उन्हें स्पष्ट पता चलता है कि उन्होंने जिम में क्या करना है। अर्थात जिम में बीतने वाले हर क्षण को पहले घर पर बैठकर महसूस करना जिससे जिम में आपका प्रदर्शन ओर बेहतर होता है और जिम में वो व्यायाम आसान लगते हैं।

8. शरीर को आराम देना बहुत जरुरी है
एक लम्बे जोरदार व्यायाम रूटीन के बाद अपने शरीर को आराम देना आवश्यक हो जाता है। इससे आपका दिमाग और शरीर दोनों फिर से ताजा महसूस करते हैं। इससे आपका वजन प्रशिक्षण से मन नहीं उबता है और वापिस लौटने पर आप और जोशीले तरीके से ट्रेनिंग करते हैं। वापिस लौटा पर आप खोए हुए समय को भी पाने के लिए ज्यादा जोरदार ट्रेनिंग करते हैं। यह अच्छी बात है। आप कितना समय आराम करते हैं इसका निश्चय आपके ट्रेनिंग से ही किया जा सकता है। एक साधारण युवक जो हफ्ते में 5 से 6 दिन अच्छे तीव्रता से व्यायाम करता है उसके लिए साल में एक बार 4 हफ्ते का आराम सही माना जाता है। इस समय एरोबिक्स करके अपने शरीर को फैट से बचाकर रखें। अपने आहार पर भी खास ध्यान रखना चाहिए। जब आप लौटते हैं तो निश्चय ही आप 2 महीनों से पहले ही अपने पूर्व सीमा से कई बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

9. व्यायाम से पहले खाए
व्यायाम से करीब 30-45 मिनिट पहले कॉम्पलेक्स कार्बोहाइड्रेट का सेवन करें अर्थात चावल, दलिया आदि। ध्यान रखें कि कभी भी व्यायाम से पूर्व कुछ मीठा नहीं खाना चाहिए जैसे चीनी, फल आदि। व्यायाम से पूर्व खाने से जिम में आपका एनर्जी ज्यादा रहता है और आप जल्दी थकान नहीं महसूस करते हैं। व्यायाम से पूर्व कुछ खाने का फायदा आपको अपने रूटीन के आखिरी सेट के आखिरी रैप तक महसूस होता रहेगा।

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10. अपने शरीर की प्रोटीन की जरुरत पूरी रखें
मसल मास बनाने के लिए प्रोटीन आवश्यक होता है और आकार बढ़ाने (increase muscle size) के लिए आपको प्रति पाउन्ड शारीरिक वजन के लिए 1-2 ग्राम प्रोटीन लेना होगा। उत्तम श्रेणी का प्रोटीन उत्तम श्रेणी के मसल मास का निर्माण करता है। प्रोटीन को खाने और शेक के जरिए से लें। कुछ समय बाद खाने से इतना प्रोटीन पाना काफी मुश्किल कार्य हो जाता है, खासकर अगर आप शरीर में फैट की मात्रा को नियंत्रण में रखना चाहते हो। तब सप्लिमेंट आपकी मदद करते हैं।

आशा करता हूँ कि मेरे बताए गए तरीको को इस्तेमाल करके आप मसल्स का आकार बढ़ाने (increase muscle size) में सफल हो पाएंगे। ऊपर बताये गए उपाय सभी बड़े बड़े बॉडीबिल्डर समय-समय पर प्रयोग में लाते रहते है।

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4 Comments

  1. bahut acha or bahut basic, aapne sahi kaha hum kitna bhi advance level par chale jaaye jab tak humara basics clear nahi hoga tab tak humhe sahi result nahi milega.

  2. aap bahut time baad article likh rahe hai, main aapke blog ko follow karta hoon please bhai jaldi jaldi likha karo aap bahut ache articles likhte hai, ye sab baatein koi nahi batata sab bass steroids and shortcuts ke piche pade hai.

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